
दादरी के बिसाहड़ा गांव का नाम देश ने 2015 में सुना था—जब गोमांस की अफ़वाह के बाद भीड़ ने अख़लाक अहमद की हत्या कर दी।
यह घटना समय के साथ इतिहास की किताबों में दर्ज हो गई, लेकिन इसकी गूंज अदालतों और राजनीति में आज भी ताज़ा है। अब इस मामले में यूपी सरकार ने अभियुक्तों के खिलाफ़ दर्ज केस वापस लेने की अर्ज़ी दी है, यानी फाइलें फिर से हिलने लगी हैं।
सरकार की ओर से पुष्टि—‘हाँ, केस वापसी की अर्जी डल चुकी है’
गौतम बुद्ध नगर के एडीजीसी भाग सिंह ने बताया— “हमें पिछले महीने पत्र मिला था। केस वापसी के लिए आवेदन दाखिल कर दिया गया है।”
सरकार का पत्र आया, वकील ने आवेदन लगाया— और अब कोर्ट तय करेगा कि ‘Return’ बटन दबाया जाए या नहीं।
12 दिसंबर—अगली सुनवाई, अगला एपिसोड
यह मामला अब एडीजे सौरभ द्विवेदी की अदालत में है।
12 दिसंबर को यह तय होगा कि केस आगे बढ़ेगा, या 10 साल पुरानी फाइल में ‘Close Case’ की मोहर लग जाएगी।
Binge-watch करने वालों के लिए यह सही टाइमलाइन है—“Episode 2024 आ रहा है।”
पीछे की कहानी—एक अफ़वाह जिसने जिंदगी बदल दी
2015 की रात में फैली एक अफ़वाह— “फ्रीज में गोमांस है।”

बस इतना सुनते ही भीड़ बेकाबू हुई और अख़लाक अहमद को पीट-पीटकर मार डाला गया। उनके भाई दानिश बुरी तरह घायल हुए।
इस घटना ने राजनीति में भूचाल लाया समाज में डर फैलाया और भारत की mob-violence डिबेट को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचा दिया।
भारत में केसों की उम्र—राजनीति से लंबी, यादें ताज़ी
भारत में कुछ केस ऐसे होते हैं जो चुनाव आते ही जागते हैं सरकारें बदलते ही करवट लेते हैं और 10–10 साल तक ‘Pending’ मोड में रहकर भी सुर्ख़ियाँ बन जाते हैं।
बिसाहड़ा केस भी उन्हीं में से एक है— जहां समय बीता, सरकारें बदलीं… लेकिन विवाद वही का वही।
NDA की सुनामी! BJP-JDU की धमाकेदार जीत, Winner List यहाँ देखिए!
